भोले शंकर (25)

भोजपुरी फिल्म भोले शंकर का संगीत रिलीज़

Pankaj Shukla : Director of Bhole Shankar

अब तक की सबसे बड़ी भोजपुरी फिल्म भोले शंकर का संगीत आज शाम यहां तमाम सितारों और मशहूर हस्तियों की मौजूदगी में रिलीज़ किया जा रहा है. मशहूर फिल्म साप्ताहिक रंगायन का संपादन कर चुके और ज़ी न्यूज़ के डिप्टी एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर रहे पंकज शुक्ल द्वारा निर्देशित और मिथुन चक्रवर्ती, मनोज तिवारी, मोनालिसा, राजेश विवेक, गोपाल सिंह, शबनम कपूर और मास्टर शिवेंदु जैसे सितारों से सजी फिल्म भोले शंकर का संगीत मशहूर फिल्म मेकर महेश भट्ट जारी करने जा रहे हैं.

सारेगामापा के फाइनलिस्ट रहे राजा हसन, मौली दवे, उज्जयनी और पूनम यादव को भी इस फिल्म में पार्श्वगायन का मौका मिला है. निर्देशक पंकज शुक्ल ने इस मौके पर कहा, "हमने फिल्म भोले शंकर के ज़रिए भोजपुरी संस्कृति को वापस सिनेमा के परदे पर पुनर्जीवित करने की कोशिश की है. भोले शंकर एक संपूर्ण पारिवारिक फिल्म है और इसे बाप-बेटी और ससुर-बहू एक साथ बैठकर सिनेमा हॉल में देख सकते हैं."

निर्माता गुलशन भाटिया की पारिवारिक फिल्म भोले शंकर में कई नए कलाकारों को मौका दिया गया है. अभिनय के क्षेत्र में जहां इसमें लखनऊ के स्थानीय कलाकारों नरेंद्र पंजवानी, डॉ. मुज्जिमल खान, अर्चना शुक्ल,, नीतू पांडे आदि को मौका मिला है, वहीं मशहूर कार्यक्रम क्राइम रिपोर्टर के एंकर राघवेंद्र मुद्गल भी इस फिल्म से बड़े परदे पर अपनी पारी शुरू कर रहे हैं. फिल्म का संगीत करीब तीन महीनों की दिन रात चली मेहनत के बाद तैयार हुआ है और मशहूर गायक शैलेंद्र सिंह की इस फिल्म से सिनेमा में वापसी हो रही है. फिल्म के गीत बिपिन बहार ने लिखे हैं और संगीत धनंजय मिश्रा ने दिया है. फिल्म के कुल नौ गाने हैं.

1. रे बौराई चंचल किरनिया- गायक - राजा हसन

- ये गाना शहरों मे बसे लोगों को गांव की याद दिलाता है और अपनी मातृभूमि की स्वर्ग से तुलना करता है. गाना के बोल और संगीत काफी भावुक हैं और इसे सुनकर अपने अपने गांवों से दूर बसे लोगों की आंखे ज़रूर नम हो आएंगी. भोजपुरी संगीत में सूफी परंपरा का ये पहला गाना है.

2. तोरी मरज़ी है क्या बता दे बिधना रे- गायक - मनोज तिवारी और पूनम यादव

- ये एक विरह गीत है जिसमें नायिका भगवान से अपना प्यार ना मिलने की शिकायत कर रही है. सारेगामापा की फाइनलिस्ट रहीं पूनम यादव का किसी फिल्म में गाया ये पहला गाना है और ये मौका पूनम को उनकी इस कार्यक्रम में परफॉरमेंस को देखते हुए दिया गया.

3. नौकरी ना मिली मन उदास भइल भाई जी - गायक - मनोज तिवारी

-बेरोजगारी का दर्द बयां करता ये गाना दरअसल हॉस्टल में नायक की अपने दोस्तों की फुल धमाल मस्ती वाला गाना है.

4. केहू सपना में अचके जगा के - गायक - उदित नारायण और कल्पना

- मशहूर गायिका कल्पना और उदित नारायण की आवाज़ से सजा ये गाना फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाता ज़बर्दस्त रोमांटिक गाना है. गाने में नायिका अपने प्रेम का इज़हार करती है, जबकि नायक उसे प्यार के खतरे समझाता है.

5. दिल के हाल बताई कैसे - गायिका - मौली दवे

- इंडियन शकीरा के नाम से मशहूर मौली दवे ने ये गाना पूरी मस्ती के साथ गाया है. इस गाने में नायिका का अंदाज़ शिकायत वाला है और वो अपनी जवानी की मुश्किल पूरी दुनिया को बता रही है.

6. पिया मोरे गइले रामा पूरबी बनिजिया - गायिका - इंदु सोनाली

- बिहार की नौटंकी में अक्सर सुनाई देने वाले इस पारंपरिक गीत को इस बार इंदु सोनाली ने अपने अंदाज़ में गाया है. इस गीत के लिए नौटंकी में बजने वाले नगाड़े खासतौर से बनारस से मुंबई मंगाए गए. ये गाना फिल्म में फ्लैशबैक में आता है जहां भोले और शंकर की मां अपनी जवानी के दिनों को याद कर रही है.

7. जब जब आवे याद तोहार - गायक - मनोज तिवारी, उज्जयनी, इंदु सोनाली

- ये गाना फिल्म में उस मौके पर आता है, जब नायक मुंबई में अपनी ज़िंदगी के सबसे बड़े इम्तिहान से दो चार होने वाला है. फिल्म का नायक थोड़ा नर्वस है और वो इस मौके पर अपनी प्रेमिका को याद करता है.

8. जय हो जय हो छठ मैया - गायक - शैलेंद्र सिंह और मालिनी अवस्थी

फिल्म जगत में शो मैन राजकपूर की खोज समझे जाने वाले गायक शैलेंद्र सिंह ने मिथुन चक्रवर्ती के लिए तराना और सुरक्षा जैसी फिल्मों में तमाम गाने गाए हैं. करीब 20 साल बाद शैलेंद्र सिंह ने एक बार फिर मिथुन के लिए गाना गाया है. मशहूर लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने इस गाने में मां की ममत को शब्दों में पिरोकर पूरी भावुकता के साथ पेश किया है.

Manoj Tiwari

9. ओम हरि ओम - गायक मनोज तिवारी

भोजपुरी संगीत में रैप का ये पहला प्रयोग है. इस भोजपुरी रैप में मनोज तिवारी के साथ कुछ रैपर्स की भी आवाज़ें हैं, मस्ती और धूम को संगीत से सजाता ये गाना जल्द ही भोजपुरी युवाओं का पसंदीदा गीत बनने वाला है.

फिल्म का कथा सार :

पूरब के एक छोटे से गांव की कहानी कहती फिल्म भोले शंकर कहानी है दो भाइयों की. अपनी विधवा मां के साथ गांव में गुजर बसर करते भोले और शंकर पर तकदीर का कहर बरपा होता है और शंकर को घर छोड़ना पड़ता है. भोले अपनी मां के साथ रहकर खेती किसानी में हाथ बंटाता है और घर में इकलौता बच्चा होने के बावजूद मां उसे आगे की पढ़ाई करने शहर भेज देती है.

भोले (मनोज तिवारी) पढ़ लिखकर गांव लौटता है तो मां को उसकी नौकरी और शादी की चिंता सताने लगती है. संगीत भोले को घुट्टी में मिला है, लेकिन मां नहीं चाहती कि वो संगीत से संगत करे और उसके बेटे को भी वो तकलीफें झेलनी पड़ें जो उसने संगीत के चलते उठाई थीं. भोले के गुरुजी (राजेश विवेक) चाहते हैं कि भोले संगीत को ही अपना करियर बनाए वो इसके लिए कोशिश करके भोले का एक संगीत कंपनी में ऑडीशन का भी इंतजाम कर देते हैं. नौकरी की तलाश में भोले मुंबई आता है और यहां उसे अपना बिछड़ा भाई शंकर (मिथुन चक्रवर्ती) मिल जाता है. भोले का आशियाना तो शंकर का ही घर है लेकिन वो शंकर के काले कारोबार से अंजान है. मां और गुरूजी भी थोड़े दिनों बाद मुंबई आ जाते हैं. भोले शोहरत के शिखर से अब बस चंद कदम ही दूर है, लेकिन तभी तकदीर फिर एक बार अपना कहर बरपाती है. अपराध की दुनिया की काली चादर भोले को अपने आगोश में लेने को बेचैन है. क्या एक बार फिर दोनों भाई हो जाएंगे एक दूसरे से जुदा? या फिर इस बार मां का आशीर्वाद कर देगा सारी मुसीबतों का अंत.

पंकज शुक्ल
निर्देशक- भोले शंकर

(पाठक अपनी प्रतिक्रियाएं पंकज शुक्ल को pankajshuklaa@gmail.com पर भेज सकते हैं)

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