भोले शंकर (24)

अब त हमार तीसरका आंख खुल गइल

Pankaj Shukla : Director of Bhole Shankar

फिल्म भोले शंकर की रिलीज़ का वक्त जैसे जैसे नज़दीक आता जा रहा है. काम का बोझ एक बार फिर से बढ़ने लगा है. पिछले चार पांच दिन से मैं फिल्म के म्यूज़िक रिलीज़ के लिए मुख्य कलाकारों और मुख्य अतिथि की तारीखों के मिलान में व्यस्त रहा. तय हुआ है कि 25 जुलाई को फिल्म का म्यूज़िक रिलीज़ फंक्शन मुंबई के टाइम एंड अगेन में रात नौ बजे किया जाएगा. मशहूर फिल्मकार महेश भट्ट इस आयोजन में मुख्य अतिथि होंगे. मनोज तिवारी ने अपने व्यस्त शेड्यूल से म्यूज़िक रिलीज़ के लिए समय देने का वादा किया है और वादा फिल्म की हीरोइन मोनालिसा ने भी तय दिन पर मुंबई पहुंच जाने का किया है. मनोज तिवारी ने भट्ट साहब की तारीखों के हिसाब से अपना शेड्यूल ऊपर नीचे भी किया है. फिल्म भोले शंकर में मैंने कई गायकों को मौका दिया है, ये बात मैं पहले ही बता चुका हूं. उस दिन राजा हसन, उज्जयनी, मौली दवे और पूनम यादव को भी खासतौर से बुलाया गया है, क्योंकि ये फंक्शन मुख्य तौर से इन नए गायकों का ही है. पूनम ने इस फिल्म में पहली बार प्लैबैक दिया है, वो आज लखनऊ में थीं. ज़ी टीवी के नए रीएल्टी शो में उन्हें शामिल नहीं किया गया है, और शायद इसीलिए वो इन दिनों ज़ी टीवी के दूसरे गायकों के संपर्क में भी नहीं है. पूनम को मैंने लखनऊ से मुंबई आने जाने का खर्च देने का वादा किया है, ताकि वो कम से कम करियर की अपनी पहली फिल्म के म्यूज़िक रिलीज़ फंक्शन में ज़रूर मौजूद रहें. इंडस्ट्री के कुछ दूसरे कलाकार भी इस दिन हमें आशीर्वाद देने के लिए मौजूद रहेंगे.

Mahesh Bhatta.

महेश भट्ट

वापस फिल्म भोले शंकर की मेकिंग की तरफ लौटता हूं. तो मिथुन चक्रवर्ती के लिए पहला शॉट वो लगाया गया जिसमें वो अपने बंगले में एंट्री कर रहे होते हैं और संतराम उनके पास गौरी के अपहरण की खबर लेकर आता है. मैंने पहला शॉट क्रेन पर लगाया और मिथुन को बंगले के जीने से अपनी जीप तक आने को कहा. इस शॉट में कोई डॉयलॉग नहीं था. इसके बाद शॉट जीने पर लगा, जहां मिथुन को बोलना था- "कौन है रे, हमरे दरवाजे पर भोले का नाम लेतअ, आवे दे ओका के." मिथुन ने ये डॉयलॉग एक झटके में बोल दिया और फिर उनकी पेशानी पर मुझे कुछ बल नज़र आए. वो सीन के अगले डॉयलॉग पढ़ रहे थे, बोले,"शुक्ला जी, ये भोजपुरी तो वो भोजपुरी नहीं है, जो हम हिंदी फिल्मों में बोलते हैं." मैंने उन्हें बताया कि जो भोजपुरी या कहें कि उत्तर भारतीय देशज भाषा हिंदी फिल्मों में बोली जाती है, वो दरअसल उत्तर प्रदेश और बिहार के किसी भी ज़िले में नहीं बोली जाती. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ठेठ खड़ी बोली से लेकर अवध की अवधी और फिर आगे प्रतापगढ़ से लेकर पटना तक बोली जाने वाली भोजपुरी का हर ज़िले में बोलने का अपना एक अलग पुट है. भोजपुरी की तो अब तक व्याकरण तक नहीं बनी है और शायद तभी इसे अभी तक संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह भी नहीं मिली. वैसे भोजपुरी फिल्मों में भी भोजपुरी अलग अलग तरह से बोली जाती है, लेकिन हमने एक सर्वमान्य भोजपुरी भाषा फिल्म में रखने की कोशिश की है और वो उतनी ही गोरखपुर - वाराणसी की भोजपुरी है, जितनी कि पश्चिमी बिहार में बोली जाने वाली भोजपुरी के. इस काम के लिए दो गुणी लोगों की मदद ली गई, पहले तो मेरे सहायक निर्देशक और संवाद लेखन के सहयोगी अजय आज़ाद हैं और दूसरे पुराने मित्र गिरिजेश मिश्र. अजय इन दिनों ज़ी न्यूज़ चैनल के न्यूज़ प्रोड्यूसर हैं और गिरिजेश आज तक चैनल में विशेष डेस्क के प्रभारी हैं. पहला ठेठ बिहारी है तो दूसरा पक्का बनारसी. दोनों की सजग नज़रों से गुजरी भोजपुरी भाषा को बोलने में मिथुन को थोड़ी परेशानी हो रही थी. मैंने उन्हें भोजपुरी के कुछ शब्दों का सही लहजे में उच्चारण बताया और असली कलाकार की तरह ये नया स्टाइल भी गांठ बांध लिया.

Mithun Chakravarty : A living legend.

शंकर (मिथुन चक्रवर्ती) के स्क्रिप्ट समुझावत निर्देशक पंकज शुक्ल

मिथुन को इसके बाद दो तीन शॉट और देने थे. एक में उन्हें अपने परिवार पर हाथ डालने वालों की खबर लेनी थी, "शंकर के परिवार पर हाथ डाले वाला इ कौन जनम लेले बा, लागतअ ओकरा माइ ठीक से जीवितिया नइखे कइलस. अरे जब दस साल में ना छोड़नी तो अब तो हमार तीसरका आंख खुल गइल." मिथुन ने जिस अंदाज़ में ये डॉयलॉग बोला, पूरे यूनिट ने दिल खोलकर तालियां बजाईं. कैमरे में मिथुन का देखने का अपना एक अलग स्टाइल हैं, गुस्सा जब उनके चेहरे पर आता है, तो अगली कतार से लेकर पिछली कतार तक में बैठा दर्शक झूम उठता है. यहां से सीन खत्म करने के बाद हम लोग कमालिस्तान के ही दूसरे हिस्से में पहुंचे. जहां मिथुन को सरौता सेठ के कब्जे से गौरी को बचाना था. सरौता सेठ यानी एक छुटभैये बदमाश का ये किरदार मैंने ज़ी न्यूज़ पर क्राइम रिपोर्टर कार्यक्रम की एंकरिंग करते रहे राघवेंद्र मुद्गल को दिया है. राघवेंद्र थिएटर के मंजे हुए कलाकार हैं, लेकिन सिनेमा के लिए उस दिन उनका पहला शॉट था और वो भी मिथुन जैसे दिग्गज कलाकार के सामने. राघवेंद्र की हालत मैं समझ सकता था. मैंने उसे अलग ले जाकर हौसला बंधाया, बड़े कलाकार के सामने संवाद बोलने की खास टेकनीक भी बताई. राघवेंद्र ने भरोसा दिया कि उसकी वजह से दिक्कत नहीं होगी. लेकिन जैसे ही साउंड, कैमरा और एक्शन बोलने की बारी आई, राघवेंद्र का पसीना छूट ही गया. राघवेंद्र उस दिन फिल्म भोले शंकर में सबसे ज़्यादा रीटेक देने वाले कलाकार बने. लेकिन पहली फिल्म होने की वजह से इसके बाद भी मैं उसका हौसला बढ़ाता रहा. ये तो मैंने बहुत बाद में राघवेंद्र को बताया कि उसकी वजह से कितनी परेशानी और कितना नुकसान हुआ.

मिथुन को भी राघवेंद्र की नादानी के चलते उस दिन घूंसा लगते लगते बचा. दरअसल राघवेंद्र को फर्जी फाइट की आदत नहीं है. फिल्मों में फाइटिंग के वक्त कलाकार और फाइटर बस चेहरे के पास से अपना हाथ निकाल देते हैं और बाद में जब साउंड इफेक्ट डाला जाता है तो लगता कि वाह क्या करारा हाथ पड़ा है. लेकिन राघवेंद्र ने सीधे सीधे मिथुन के चेहरे पर मुक्का चला दिया, वो तो मिथुन एलर्ट थे, और उन्होंने अपना चेहरा ऐन मौके पर पीछे कर लिया, नहीं तो उस दिन अनर्थ हो जाता. मिथुन और राघवेंद्र के कॉम्बीनेशन सीन लेने के बाद हमने सरौता सेठ के बदमाशों के साथ मिथुन की फाइट शूट की और दादा को विदा कर दिया. इसके बाद अंधेरा होते ही हमने शुरू कर दिया राघवेंद्र की फिल्म में एंट्री का सीन. राघवेंद्र की एंट्री फिल्म में बड़े ही ड्रामेटिक अंदाज़ में होती है, उनके उसी पुराने डॉयलॉग के साथ जो वो कभी क्राइम रिपोर्टर में बोला करते थे,"चैन से सूते के बा तो जाग जा लोगिन (चैन से सोना है तो अब जाग जाओ). "

कहा सुना माफ़,

पंकज शुक्ल
निर्देशक- भोले शंकर

(पाठक अपनी प्रतिक्रियाएं पंकज शुक्ल को pankajshuklaa@gmail.com पर भेज सकते हैं)

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