भोले शंकर (23)

कठघरे में शंकर... ?

Pankaj Shukla : Director of Bhole Shankar

लोग अक्सर मुझसे ये पूछते हैं कि आखिर दादा (मिथुन चक्रवर्ती) फिल्म भोले शंकर में काम करने को राज़ी कैसे हुए? फिल्म भोले शंकर के लिए हां करने से पहले मिथुन ने कम से कम दस भोजपुरी फिल्मों के ऑफर्स ठुकराए थे। यहां तक कि बिहार के बड़े ड्रिस्टीब्यूटर और प्रोड्यूसर डॉक्टर सुनील के साथ हुए झगड़े की जड़ में भी एक भोजपुरी फिल्म ही है। लेकिन, ना तो हम लोगों को इस झगड़े के बारे में पहले से पता था और ना ही मुझे इस बात में ज़रा भी ईमानदारी नज़र आती है कि एक कलाकार की फिल्म भारत के किसी राज्य में इसलिए ना प्रदर्शित होने दी जाए क्योंकि ये कलाकार सूबे के एक नेता की फिल्म में काम नहीं करना चाहता। फिल्म भोले शंकर पूरी हो चुकी है। इन दिनों बातचीत फिल्म के वितरण को लेकर चल रही है और ब्लैकमेलिंग की पहली धमकी हमें मिल चुकी है। फिल्म भोले शंकर बिहार के दर्शकों तक पहुंचेगी या नहीं और अगर पहुंचेगी तो कब तक, इसे लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। मिथुन चक्रवर्ती की हिंदी फिल्मों की बिहार में रिलीज़ पर एक लाख रुपये का फाइन लगाने वाले फिल्म भोले शंकर को बिहार में रिलीज़ होने देने के लिए दस लाख रुपये मांग रहे हैं। अब समझ में ना आने वाली बात ये है कि क्या भोजपुरी फिल्मों की बिहार में इतनी कमाई होती है कि एक प्रोड्यूसर सिर्फ फिल्म रिलीज़ करने के लिए दस लाख का चढ़ावा सूबे के नेताओं को चढ़ा सके। किसी भी फिल्म का प्रोड्यूसर अपने खून पसीने की कमाई जोड़कर एक फिल्म बनाने की हिम्मत जुटाता है तो क्या वो कोई गुनाह करता है। क्या भोजपुरी फिल्मों में मिथुन चक्रवर्ती को लेना एक गुनाह है, जो हमसे ये कहा जाता है कि हमने जान बूझकर ज़हर खाया है? भारत का संविधान हर नागरिक को देश के किसी भी कोने में व्यापार करने की स्वतंत्रता देता है। किसी भी अदालत में बिहार में मिथुन की फिल्मों पर लगी पाबंदी की कोई अहमियत नहीं, मुंबई के प्रोड्यूसर इसके खिलाफ अदालत का दरवाज़ा नहीं खटखटाते हैं तो बस इसलिए कि वो कारोबारी लोग हैं, और कोई भी कारोबारी काले कोट से दूर ही रहना चाहता है, लेकिन ये संयम, ये सब्र और सांत्वना कब तक? ये सवाल बिहार की बीजेपी- जेडीयू सरकार से भी है कि उनके राज में ये नाइंसाफ़ी कब तक?

Mithun Chakravarty : A living legend.

कवना बाति पर खिसियाईल बाड़ऽ दादा (मिथुन चक्रवर्ती) ?

मिथुन चक्रवर्ती को लेकर भोजपुरी फिल्म बनाने पर हम लोगों को दाद मिलनी चाहिए थी। इतनी बड़ी फिल्म को उत्तर प्रदेश के प्रादेशिक अंचलों में शूट करने पर वहां की सरकार से मदद मिलनी चाहिए थी, लेकिन भोजपुरी का कोई मां बाप नहीं। ना लालू प्रसाद यादव को इस सिनेमा से जुड़े लोगों की परवाह रही, उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना कार्यालय ने सरकारी सहायता की दरख्वास्त पर गौर तक नहीं किया। और अब बारी बिहार सरकार की है। मिथुन चक्रवर्ती फिल्म भोले शंकर की शूटिंग के लिए पहले दिन आए, तब भी हम लोगों की देर तक इन्हीं मसलों पर बातें होती रही थीं। मैं पेशे से अब तक पत्रकार ही रहा हूं, इसीलिए अन्याय किसी भी तरह का और किसी भी पर हो, सह नहीं पाता हूं। मिथुन चक्रवर्ती भी गरम खून के हैं, अन्याय के खिलाफ अक्सर उन्होंने मोर्चा खोला है। जंग में जीत किसकी होती है, मसला ये नहीं होता, मसला ये होता है कि जंग किस मुद्दे पर लड़ी गई और उसमें सच के साथ कौन खड़ा हुआ। ये ज़रूरी नहीं कि हर बार हक़ की लडाई में कृष्ण की मदद मिल ही जाए, लेकिन कौरवों की मनमर्जी से मुचौटा लेने के लिए अगर पांच पांडव भी बचे रहे, तो हस्तिनापुर पर कभी अन्यायी ताकतों का कब्जा हो नहीं पाएगा।

Mithun Chakravarty : A living legend.

शंकर (मिथुन चक्रवर्ती) के स्क्रिप्ट समुझावत निर्देशक पंकज शुक्ल

फिल्म भोले शंकर को मैंने सिर्फ निर्देशित ही नहीं किया, इसका एक एक पुर्जा जोड़ा है। आम तौर पर एक फिल्म निर्देशक का काम फिल्म की पहली कॉपी तैयार हो जाने के साथ ही खत्म हो जाता है। लेकिन इस फिल्म को मुझे इसकी मंजिल यानी इसके दर्शकों तक पहुंचाना है और इसके बीच में किसी अड़चन या किसी दबंग की धमकी का कोई काम नहीं। मिथुन चक्रवर्ती ने फिल्म भोले शंकर के पहले सीन में भी यही किया। मिथुन ने इस फिल्म के लिए पहले दिन वो शॉट दिया जिसमें भोले का दोस्त संतराम उनके पास गौरी का अपहरण हो जाने की खबर लेकर आता है। कमालिस्तान के क्रिस्टल हाउस में इस सीन की शूटिंग होनी थी, और हम लोग तय समय पर सारा माल असबाब लेकर वहां पहुंच गए। मिथुन के लिए मैंने फिल्म गुलामी में उनकी कॉस्ट्यूम से मिलती जुलती ड्रेस तैयार करवाई और जब वो पीच कलर की ये ड्रेस पहनकर कैमरे के सामने आए तो पूरी यूनिट ने दिल खोलकर तालियां बजाईं। इसे कहते हैं असली सितारे की चमक। मिथुन को बतौर कलाकार भी और बतौर एक इंसान भी बॉलीवुड का बच्चा बच्चा पसंद करता है। वो भोजपुरी फिल्म में काम करने को राज़ी हुए, ये उनका बड़प्पन है। पहले दिन की शूटिंग के कुछ और किस्से अगली बार, पढ़ते रहिए कैसे बनी भोले शंकर..

कहा सुना माफ़,

पंकज शुक्ल
निर्देशक- भोले शंकर

(पाठक अपनी प्रतिक्रियाएं पंकज शुक्ल को pankajshuklaa@gmail.com पर भेज सकते हैं)

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