भोले शंकर (18)

फिरंगियों का फेर

Pankaj Shukla : Director of Bhole Shankar

लखनऊ के जिस इंस्टीट्यूट में हम लोग फिल्म भोले शंकर की शूटिंग कर रहे थे. उसी के पास एक बहुत बड़ा फॉर्म हाउस है. फॉर्म हाउस में खेती होती है और इसकी पूरी की पूरी उपज विदेश भेजी जाती है. और, इस खेती को नाम दिया गया है ऑर्गेनिक फार्मिंग. गांव देहात के लोगों को इसका मतलब समझा दिया जाए तो ज़ाहिर है हर कोई ठट्ठा मारकर हंसेगा. जी हां, रासायनिक खाद खरीदना अभी तीस साल पहले तक गांव के हर किसान के बस की बात नहीं होती थी. वो तो बस घूरे और गोबर की खाद से ही काम चलाता था. और अब गोबर की खाद से होने वाली खेती को नाम दे दिया गया है ऑर्गेनिक फार्मिंग. और विदेश में ऐसी खेती से होने वाली फसल की बड़ी पूछ है. खैर, इस फार्म हाउस का जिक्र यहां मैं कर रहा हूं उस गाने के लिए, जिसकी शूटिंग हमने यहां की. हुआ यूं कि आईआईएसई के जिन मामाजी की जिक्र मैंने पिछले लेख में किया था, उन्होंने ही मुझसे इस फार्म हाउस के गुणगान किए. उन्होंने ये भी कहा कि वो यहां शूटिंग की परमीशन चुटकियों में दिला देंगे. उन्होंने अपना वादा निभाया भी. उनके कहे मुताबिक हमने अगले दिन फार्म हाउस में डेरा डाल दिया. लोकेशन वाकई दिल फरेब थी और गाने के लिए एकदम मुफीद. ये गाना फिल्म भोले शंकर में उस जगह आता है जहां भोले अपनी एक गलती के लिए गौरी से माफी मांगने आता है और बदले में गौरी अपना दिल भोले को दे बैठती है.

Monalisa.

". केहू सपना में अचके जगा के....." - भोले को रिझाने के लिए बला की खूबसूरत गौरी (मोनालिसा) की एक अदा

कोरियोग्राफर रिक्की और कैमरामैन राजू केजी के साथ रात में बैठक हुई और तय हुआ कि सुबह आठ बजे से हम लोग शूटिंग शुरू कर देंगे. हीरोइन को तैयार होने में अमूमन वक्त ज़्यादा लगता है लिहाजा मोनालिसा पहले लोकेशन पर पहुंची. फार्म हाउस की ही एक सुंदर सी झोपड़ी को मोनालिसा का मेकअप रूम बना दिया गया. मनोज तिवारी को आठ बजे तक होटल से तैयार होकर पहुंचना था. मोनालिसा के तो आठ बजे तक तैयार हो जाने का मुझे पूरा भरोसा था, बस थोड़ी हिचक थी तो इस बात की कि मनोज आठ बजे आ पाएंगे या नहीं. मनोज की आदत रात में देर से सोने और सुबह थोड़ा देर से जागने की है, इसका मुझे अंदाज़ा था. और इसी आशंका के चलते मैंने शूटिंग सात बजे की बजाय आठ बजे से रखी, लेकिन मनोज आठ बजे तक होटल से ही निकल पाए. इसी बीच मोनालिसा का मेकअप मैन महेश भागते हुए आया कि मोना मुझे बुला रही हैं. मैंने सोचा पता नहीं कि क्या दिक्कत आ खड़ी हुई. तुरंत मोना के मेकअप रूम में पहुंचा तो उसका चेहरा उतरा हुआ था. मानसी की हेयरस्टाइल और बाबू के मेकअप ने उस दिन मोनालिसा को किसी अप्सरा की तरह सजा दिया था, लेकिन मोना के चेहरे की परेशानी बता रही थी कि उसे कोई दिक्कत है. मैंने सभी लोगों से बाहर जाने को कहा. तो मोनालिसा ने अपनी दिक्कत बताई. दरअसल ड्रेस डिज़ाइनर ने मोनालिसा के लिए जो ब्लाउज़ तैयार किया था, वो इतना बड़ा बना दिया था कि टुनटुन को भी ढीला पड़े. परेशानी की वजह जानकर मुझे एकदम से हंसी आ गई, लेकिन मोना एकदम से उदास हो गई. बोली, यही एक रोमांटिक गाना आपने मुझे फिल्म में दिया है और उसकी भी ड्रेस गड़बड़ है. मोना से ये बात सुनकर मैं सीरियस हुआ, लेकिन शहर से इतनी दूर ना तो दर्जी मिल सकता था और ना ही नया ब्लाउज़.

Manoj Tiwari and Monalisa.

"बाटे प्यार में बड़का खतरा, हरदम ना बनेला जतरा...".- गौरी के प्रणय निवेदन से दूर भागता भोले (मनोज तिवारी)

अब बारी ड्रेसमैन समीर के इम्तिहान की थी. मैंने समीर को अकेले में बुलाया. परेशानी की वजह समझाई और मोनालिसा से कहा कि वो थोड़ा इंतज़ार कर ले, मैं इंतज़ाम करता हूं. समीर ब्लाउज़ लेकर स्टोर रूम गया. बेचारे ने सुई धागे से 15 मिनट के भीतर ब्लाउज़ की फिटिंग दुरुस्त की. जिस काम के लिए पटेल ड्रेसवाला ने दो हफ्ते गंवाए, वो काम समीर मिनटों में कर लाया. लेकिन दाएं तरफ की आस्तीन में अब भी कुछ गड़बड़ थी तो कोरियोग्राफर रिक्की का अनुभव काम आया. रिक्की ने मोनालिसा के लिए नई स्टाइल सोच ली. जिसमें उसे दाहिने बाजू पर अपनी साड़ी पीछे की तरफ से लानी थी. तब तक मनोज तिवारी भी आ गए और शुरू हो गई गाने की शूटिंग. मैंने राजू केजी और रिक्की गुप्ता को स्टोरीबोर्ड समझाया और अपने कुछ मेहमानों से बातें करने लगा. गाने के दो अंतरे शूट हो भी नहीं पाए थे कि एकदम से फार्म हाउस में मुझे कुछ बेचैनी समझ में आने लगी. मैंने पता लगाया तो मालूम हुआ कि फार्म हाउस की मालकिन आने वाली है और फार्म हाउस के मैनेजर ने मामाजी को शायद दोपहर दो बजे तक का ही समय दिया था. मैंने खुद जाकर फार्म हाउस के मैनेजर से बातचीत की लेकिन वो मानने को तैयार नहीं हुए. उनका कहना था कि उनकी विदेशी मालकिन के कुछ विदेशी मेहमान आने वाले हैं और वो फार्म हाउस पर उस दिन लंच करने वाले हैं. इन फिरंगियों को हिंदुस्तानियों का आसपास दिखना शायद ठीक नहीं लगता और वो पूरी तसल्ली के साथ अकेले में ही मस्ती करना चाहते थे.

मेरी परेशानी ये थी कि मैं दूसरे अंतरे को बीच में आधा नहीं छोड़ सकता था. तीसरा अंतरा तो खैर मैं पहले ही दूसरी लोकशन पर करने वाला था, लेकिन समस्या ये थी की फार्म हाउस मैनेजर हमें ये अंतरा भी शूट नहीं करने दे रहा था. वो तुरंत पैकअप चाहता था तो मैंने समझाया कि भैया सौ लोग पूरे सामान के साथ एकदम से तो फार्म हाउस के बाहर नहीं निकल सकते, सब्र रखो, हम काम बंद कर चुके हैं, बस सामान निकलने में जितनी देर लगे. वो आश्वस्त रहें और शूटिंग से दूर भी तो मैंने एक प्रोडक्शन वाले को इनके साथ लगाया और कहा कि इन्हें लेकर गेट पर जाएं ताकि इन्हें सामान बाहर निकलता दिखता रहे. अब सुनिए कमाल की बात, फार्म हाउस मैनेजर को गेट पर खड़ा करके मैं भागा वहां जहां शूटिंग चल रही थी, मैंने रिक्की और राजूकेजी दोनों को समझाया कि जब तक उधर से सामान उठ रहा है आप लोग इधर फटाफट अंतरा पूरा कर लें. अब हो ये रहा था कि फार्म हाउस के एक कोने से लाइट्स और क्रेन वगैरह ट्रक में लोड हो रही थीं और दूसरे कोने पर हम ट्राली, रिफ्लेक्टर और कैमरा लेकर अंतरा निपटाने में लगे थे. और जब तक सामान हटते हटते लोग हम तक पहुंचे हम लोग अंतरा शूट कर चुके थे, गाने के दूसरे अंतरे में फिरंगियों के फेर ने परेशानी में डाला तो तीसरे अंतरे में सूरज देवता ने ली हमारी परीक्षा, लेकिन इस पर बात अगली बार, पढ़ते रहिए कैसी बनी भोले शंकर?

कहा सुना माफ़,

पंकज शुक्ल
निर्देशक- भोले शंकर

(पाठक अपनी प्रतिक्रियाएं पंकज शुक्ल को pankajshuklaa@gmail.com पर भेज सकते हैं)

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