भोले शंकर (12)
सालगिरह मुबारक ! मिथुन दा.

मैं भोले शंकर कभी नहीं बनाता अगर शंकर के रोल के लिए मुझे मिथुन दा का साथ ना मिलता. मिथुन दा आज 58 साल के हो गए. मिथुन दा की सालगिरह के चलते आज भोले शंकर की मेकिंग लिखने की बजाय मेरा दिल कर रहा है मेकिंग ऑफ ए रीयल स्टार लिखने का. ज़िंदगी की चुनौतियों को अपनी कामयाबी बनाने वाले गौरांग चक्रवर्ती को मायानगरी ने नाम दिया मिथुन. कभी पुलिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल रहा ये नक्सलाइट अब डॉन भी बनता है तो लोग तालियां बजाते हैं. और अब भले मिथुन दा ने अपना हेयरस्टाइल बदल लिया हो, लेकिन ये बात भी किसी से छुपी नहीं कि राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन के बाद अगर किसी हीरो का हेयर स्टाइल हिंदुस्तान में लोगों के बीच क्रेज़ बना तो वो मिथुन ही हैं.

"इ एक भाई के भाई से खून के रिश्ता का वादा बा" - छोटे भाई भोले की प्रेमिका को बचाने के प्रयास में घायल शंकर (मिथुन चक्रवर्ती)
कम लोग ही जानते होंगे कि किसी देश की भाषा में सबसे ज़्यादा फिल्में करने का विश्व रिकॉर्ड मिथुन चक्रवर्ती ने बनाया है. लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इसका ज़िक्र है. मिथुन दा ने ये रिकॉर्ड हिंदी फिल्में करके बनाया है. और ये बात भी कम लोगों को ही पता होगी कि मिथुन देश के सबसे बड़े income tax payer भी रह चुके हैं और वो भी लगातार 1994 से लेकर 1999 तक लगातार पांच साल. और ये वही मिथुन हैं जिन्होंने पहली ही फिल्म मृगया में बेस्ट एक्टर का नेशनल अवार्ड मिलने के बाद दिल्ली से निकलने वाली एक फिल्म पत्रिका को ज़िंदगी का पहला इंटरव्यू एक बिरयानी के एवज में दिया था. जी हां तब फिल्म मैगज़ीन मायापुरी के लिए मुंबई से ज़ेड ए ज़ौहर साहब इंटरव्यू भेजा करते थे. 1976 के नेशनल फिल्म अवार्ड्स एनाउंस होने के बाद ज़ौहर साब को दिल्ली दफ्तर से फोन गया कि किसी नए लड़के मिथुन को बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला है, उसका इंटरव्यू करके भेजो. जौहर साब सुबह से मिथुन की तलाश में भटक रहे थे और मिथुन उन्हें मिले एक प्रोड्यूसर के दफ्तर के बाहर मुलाकात के लिए इंतज़ार करते. बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिलने की खबर ज़ौहर साहब ने ही मिथुन को दी और कहा कि उनका इंटरव्यू चाहिए. मिथुन ने दो दिन से कुछ खाया नहीं था. फाकाकशी के ऐसे दिन भी देखे हैं इस सुपर स्टार ने. मिथुन ने कहा इंटरव्यू वो तभी देंगे जब जौहर साहब पहले उन्हें खाना खिलाएं. ज़ौहर साहब की जेब में जितने पैसे थे, उनसे उन्होंने बिरयानी मंगाई. मिथुन के मुंह में निवाला गया और तब जाकर ज़ौहर साहब को मिला मिथुन का इंटरव्यू. वो मिथुन चक्रवर्ती के करियर का पहला इंटरव्यू था.

"माई के ममता एतना पावन"- छठ पूजा खातिर के लिए घर से निकलता शंकर (मिथुन चक्रवर्ती)
कहते हैं कि किस्मत मेहनत करने वालों का ही साथ देती है. और मिथुन इसकी जीती जागती मिसाल हैं. कभी मुंबई की सड़कों पर गाड़ियों पर स्टिकर चिपकाने वाला ये इंसान आज सैकड़ों लोगों को अपने होटलों में रोज़गार दे रहा है. बत्तीस साल हो गए मिथुन को फिल्म इंडस्ट्री में आए हुए लेकिन किंग्स सर्किल के अपने दोस्तों को वो अब भी याद करते हैं. किंग्स सर्किल ही वो इलाका है जहां मिथुन ने मुंबई आने के बाद शुरुआती दिन गुजारे. वहां एक ईरानी होटल चलाने वाले के बेटे से मिथुन की दोस्ती थी. और मिथुन का दोस्त इंतज़ार करता रहता था अपने पिता के लंच के लिए घर जाने का. जैसे ही वो लंच के लिए घर जाते, मिथुन और उनके दोस्तों की चौकड़ी जा जमती, इस रेस्टोरेंट मे- मुफ्त का खाना खाने. हिंदी सिनेमा की डिस्को से दोस्ती कराने वाले इस बंगाल टाइगर को कल्ट स्टार कहा जाता है और वो इसलिए कि किसी भी कलाकार के नाम को अपने नाम के साथ जोड़ने की मिसाल और कहीं नहीं मिलती. मैं खुद ऐसे तमाम लोगों को जानता हूं जिन्होंने अस्सी के दशक में अपने नाम के आगे मिथुन लिखना शुरू कर दिया था. जैसे सुरेश मिश्रा "मिथुन" वगैरह. मिथुन की तरह बाल रखना, उनकी ही तरह के कपड़े पहनना और नान चाकू लेकर घूमना उस वक्त के नौजवानों का शगल बन गया था.

"घबड़ा मत हम आवत आनी" - गरीबों का मसीहा शंकर (मिथुन चक्रवर्ती)
राजकपूर के बाद अगर किसी कलाकार का रूस में डंका बजा तो वो मिथुन ही थे. अब भी मिथुन दा वहां जाते हैं तो लोग उन्हें जिमी कहकर बुलाते हैं. दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज ने हाल ही में फिल्म भोले शंकर की डबिंग के दौरान मुझे एक दिलचस्प किस्सा सुनाया. अजय जी बीच में चीन गए हुए थे और वहां उन्होंने एक लड़के को मैंडोलिन पर फिल्म डिस्को डांसर की धुन बजाते हुए सुना. इस लड़के को हिंदी तक समझ में नहीं आती थी. अजय जी ने उससे किसी तरह बात की तो लड़के ने ख्वाहिश जताई इस फिल्म हीरो मिथुन चक्रवर्ती से मिलने की. उस वक्त मिथुन दा भी हम लोगों के साथ बैठे थे, अजय जी ने इस पूरे वाकये को सुनाने के साथ मुझे एक आइडिया भी दिया - इन सर्च ऑफ मिथुन- नामकी फिल्म बनाने का. अजय जी आइडिया आपका ज़ोरदार है और हो सकता है कि कभी इस पर फिल्म बनाने का मौका भी मिले. वैसे कमर्शियल सिनेमा के इस सुपर स्टार ने ऑफ बीट फिल्मों में जब भी काम किया, अवार्ड्स उनके पीछे हो लिए. तहादेर कथा और स्वामी विवेकानंद जैसी फिल्में ये बात साबित करती हैं, जिन्होंने उन्हें दो नेशनल अवार्ड और दिलाए. अपनी दूसरी पारी में मिथुन एक बार फिर लंबी रेस की शुरुआत फिल्म गुरु से कर चुके हैं. युवराज और वीर जैसी फिल्में अभी आनी बाकी हैं, और साथ ही होना बाकी है वो मुकाबला जो शायद अग्निपथ के बाद अधूरा छूट गया था. मिथुन दा के डिस्कोडांसर और सुरक्षा जैसी फिल्मों में किए गए किरदारों से प्रेरणा लेकर विदेशी कॉमिक्स कंपनी वर्जिन जल्द ही एक कॉमिक सीरीज़ शुरू करने वाली है, इसे कहते हैं लिविंग लीजेंड होना. दादा, आप हमेशा सलामत रहे, आपके फैन्स और आपके दोस्तों की यही दुआएं हैं.
फिल्म भोले शंकर की मेकिंग पढ़ने के बाद मुझे तमाम शुभचिंतकों के मेल आ रहे हैं, उन सभी को फिर एक बार धन्यवाद. कुछ लोगों ने मेरा फोन नंबर और पता चाहा है. मेरा पता है- पंकज शुक्ल, डी 704, भूमि क्लासिक, इन ऑरबिट मॉल के सामने, मलाड वेस्ट, मुंबई- 400064. काल्ह फेन लिखब, कइसे बनल भोले शंकर?
कहा सुना माफ़,
पंकज शुक्ल
निर्देशक- भोले शंकर
(पाठक अपनी प्रतिक्रियाएं पंकज शुक्ल को pankajshuklaa@gmail.com पर भेज सकते हैं)
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